णमोकार मंत्र — अर्थ
सभी परंपराओं के जैन प्रतिदिन जिसका पाठ करते हैं, वह णमोकार मंत्र पाँच परमेष्ठियों — पंच परमेष्ठी — को नमन करता है। इसमें किसी व्यक्ति का नाम नहीं, केवल गुणों का वंदन है।
- णमो अरिहंताणं
- मैं अरिहंतों को नमन करता हूँ — जिन्होंने आंतरिक कषायों को जीत लिया है और मार्ग का उपदेश देते हैं।
- णमो सिद्धाणं
- मैं सिद्धों को नमन करता हूँ — सभी कर्मों से मुक्त आत्माएँ।
- णमो आयरियाणं
- मैं आचार्यों को नमन करता हूँ — संघ के नायक।
- णमो उवज्झायाणं
- मैं उपाध्यायों को नमन करता हूँ — शास्त्रों के शिक्षक।
- णमो लोए सव्व साहूणं
- मैं लोक के सभी साधुओं को नमन करता हूँ — मार्ग पर चलने वाले साधु-साध्वी।
यह पंच नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है, और सब मंगलों में प्रथम मंगल है।

