आचार्य
युगों-युगों के आचार्य
तीर्थंकरों के बाद, 2,500 वर्षों से यह उपदेश उन्होंने आगे बढ़ाया है जिन्होंने इसे जिया — शिष्य, विद्वान, कवि और विहार करने वाले तपस्वी। ये उनकी कथाएँ हैं।
युग 1 · लगभग 600–500 ई.पू.
महावीर के शिष्य
जिन्होंने स्वयं महावीर से उपदेश सुना और उसे आगे बढ़ाया।
- गौतम स्वामीमहावीर के प्रमुख शिष्य (गणधर)6ठी–5वीं शताब्दी ईसा पूर्वगोबर ग्राम, मगध → पावादोनों परंपराएँ
- सुधर्मा स्वामीमहावीर के पश्चात संघ के नायक6ठी–5वीं शताब्दी ईसा पूर्वकोल्लाग, मगधदोनों परंपराएँ
- चंदनबालामहावीर की प्रथम शिष्या6ठी–5वीं शताब्दी ईसा पूर्वचंपा → कौशांबीदोनों परंपराएँ
- जम्बू स्वामीसुधर्मा के शिष्य; इस काल में केवलज्ञान प्राप्त करने वाले अंतिम5वीं शताब्दी ईसा पूर्वराजगृह (राजगीर)दोनों परंपराएँ
युग 2 · लगभग 400 ई.पू. – 500 ई.
उपदेश के संरक्षक
वे आचार्य जिन्होंने महावीर के बाद की प्रारंभिक शताब्दियों में शास्त्रों को सुरक्षित रखा और लिपिबद्ध किया।
- आचार्य भद्रबाहुसंपूर्ण शास्त्रों के अंतिम ज्ञाताईसा पूर्व 4थी शताब्दीपाटलिपुत्र → श्रवणबेलगोला (दिगंबर परंपरा)दोनों परंपराएँ
- आचार्य स्थूलभद्रअद्भुत आत्मसंयम वाले मुनि; आगमों के संरक्षकईसा पूर्व 4थी–3री शताब्दीपाटलिपुत्रश्वेतांबर
- आर्य सुहस्तीसम्राट संप्रति के गुरु; जैन धर्म को मगध से दूर तक फैलायातीसरी सदी ई.पू.मगध और उज्जैन (मौर्य काल)श्वेतांबर
- आचार्य गुणधरकषायपाहुड के रचयिता, कषायों पर प्राचीन आगम ग्रंथई.पू. 1ली सदीस्थान अज्ञात (प्राचीन दिगंबर परंपरा)दिगंबर
- आर्य वज्रस्वामीदस पूर्वों के अंतिम ज्ञाता; अनेक परवर्ती परंपराओं के मूल30 ई.पू.–57 ई.तुंबवन (अवंती) और समूचा उत्तर भारतश्वेतांबर
- आचार्य धरसेनबचे हुए पूर्व-ज्ञान के धारक; पुष्पदंत और भूतबलि के गुरुई. 1-2री सदीचंद्र गुफा, गिरनार, सौराष्ट्रदिगंबर
- आचार्य पुष्पदंत एवं भूतबलिपहले लिखित दिगंबर आगम षट्खंडागम के रचयिताई. 1-2री सदीगिरनार; बाद में वनवास (कर्नाटक) और द्रविड़ देशदिगंबर
- आचार्य कुंदकुंदसर्वाधिक पूज्य दिगंबर आचार्यईस्वी की आरंभिक शताब्दियाँकोनकोंडला (कोंडकुंदे), दक्षिण भारतदिगंबर
- आचार्य उमास्वामीतत्त्वार्थ सूत्र के रचयितालगभग 2री–5वीं शताब्दी ईस्वीउत्तर भारत (श्वेतांबर वृत्तांतों में कुसुमपुर)दोनों परंपराएँ
- आचार्य समंतभद्रदार्शनिक और स्वयंभू स्तोत्र के कविलगभग 2री–5वीं शताब्दी ईस्वीदक्षिण भारतदिगंबर
- देवर्द्धिगणि क्षमाश्रमणश्वेतांबर आगमों को लिपिबद्ध करने वाली वल्लभी वाचना के प्रमुख5वीं सदी ई.वल्लभी, सौराष्ट्र (गुजरात)श्वेतांबर
युग 3 · लगभग 450 – 1700 ई.
शास्त्रीय युग के महान आचार्य
दार्शनिक, तर्कशास्त्री, कवि और राजाओं के गुरु — कर्नाटक के राजदरबारों से गुजरात और अकबर की दिल्ली तक।
- आचार्य सिद्धसेन दिवाकरजैन न्याय के अग्रदूत; सन्मति तर्क के रचयिताल. 5वीं सदी ई.मध्य और पश्चिम भारत (परंपरा उन्हें उज्जैन से जोड़ती है)श्वेतांबर
- आचार्य पूज्यपाददार्शनिक और वैयाकरण; सर्वार्थसिद्धि के रचयिताई. 5-6वीं सदीकर्नाटक (पश्चिमी गंग राज्य)दिगंबर
- जिनभद्र गणि क्षमाश्रमणमहान भाष्यकार, जिन्होंने दर्शन में आगमिक परंपरा का पक्ष रखा6ठी–7वीं सदी ई.पश्चिम भारत; वल्लभी (गुजरात)श्वेतांबर
- आचार्य मानतुंगप्रिय भक्तामर स्तोत्र के रचयिता कवि-मुनि7वीं सदी ई.वाराणसी या मालवा (भिन्न कथाएँ)दोनों परंपराएँ
- आचार्य रविषेणसंस्कृत में जैन रामायण के रचयिता कवि7वीं सदी ई.स्थान अज्ञातदिगंबर
- आचार्य हरिभद्र सूरिदार्शनिक और विपुल ग्रंथकार8वीं शताब्दी ईस्वीचित्तौड़, राजस्थानश्वेतांबर
- आचार्य अकलंकजैन प्रमाण-शास्त्र के संस्थापक तार्किक8वीं सदी ई.मान्यखेट, कर्नाटक (परंपरा के अनुसार); राष्ट्रकूट कालदिगंबर
- आचार्य वीरसेनषट्खंडागम की महान टीका धवला के रचयिताई. 8-9वीं सदीवाटग्राम, दक्कन (राष्ट्रकूट राज्य)दिगंबर
- आचार्य जिनसेनआदिपुराण के रचयिता; सम्राट अमोघवर्ष के गुरु9वीं शताब्दी ईस्वीराष्ट्रकूट राजदरबार, मान्यखेट (कर्नाटक)दिगंबर
- आचार्य अमृतचंद्रकुंदकुंद के टीकाकार; पुरुषार्थसिद्ध्युपाय के रचयिता10वीं सदी ई.स्थान अज्ञातदिगंबर
- आचार्य नेमिचंद्रगोम्मटसार के रचयिता; चामुंडराय के गुरु10वीं शताब्दी ईस्वीश्रवणबेलगोला, कर्नाटकदिगंबर
- आचार्य अभयदेव सूरिग्यारह अंगों में से नौ पर संस्कृत टीकाएँ लिखीं11वीं सदी ई.मालवा और गुजरात (पाटण, खंभात)श्वेतांबर
- आचार्य हेमचंद्रविद्वान, कवि और राजा कुमारपाल के मार्गदर्शक1088–1173 ईस्वीधंधुका और पाटन, गुजरातश्वेतांबर
- आचार्य हीरविजय सूरितपागच्छ के आचार्य, जिन्होंने सम्राट अकबर को अहिंसा की प्रेरणा दी1527–1596पालनपुर (गुजरात) → फतेहपुर सीकरी → ऊनाश्वेतांबर
- उपाध्याय यशोविजयतपागच्छ के उपाध्याय, महान नैयायिक और भक्ति-कवि1624–1688कनोडा (उत्तर गुजरात) → वाराणसी → डभोईश्वेतांबर
युग 4 · 1800 के दशक से आज तक
आधुनिक युग
पिछली दो शताब्दियों के आचार्य जिन्होंने मुनि-मार्ग को नवजीवन दिया और जैन मूल्यों को जन-जीवन तक पहुँचाया।
गुरु और शिष्य
गुरु, शिष्य और पट्टधर की वे परंपराएँ जो आज हर संघ को आगे ले जा रही हैं। कथा पढ़ने के लिए नाम पर टैप करें।
- आचार्य विजयानंद सूरिपंजाब में श्वेतांबर जैन धर्म को पुनर्जीवित करने वाले सुधारक1837–1896लहरा (फ़िरोज़पुर ज़िला), पंजाब; गुजरांवाला में देहावसानश्वेतांबर
- आचार्य विजय वल्लभ सूरिजैन विद्यालयों, महाविद्यालयों और छात्रावासों के प्रेरक आचार्य1870–1954वडोदरा, गुजरात; कार्यक्षेत्र पंजाब; मुंबई में देहावसानश्वेतांबर
- आचार्य शांतिसागर20वीं शताब्दी में दिगंबर मुनि परंपरा के पुनरुद्धारक1872–1955भोज, बेलगावी ज़िला, कर्नाटकदिगंबर
- आचार्य बुद्धिसागर सूरिकवि, योगी और 100 से अधिक ग्रंथों के लेखक1874–1925विजापुर, उत्तर गुजरातश्वेतांबर
- आचार्य वीरसागरआचार्य शांतिसागर के प्रथम मुनि शिष्य और प्रथम पट्टधर1876–1957जन्म औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के पास; समाधि खानियाजी, जयपुरदिगंबर
- आचार्य आत्मारामवर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ के प्रथम आचार्य1882–1962राहों, पंजाब; बाद में लुधियानास्थानकवासी (श्वेतांबर)
- आचार्य ज्ञानसागरसंस्कृत कवि-विद्वान और आचार्य विद्यासागर के गुरु1897–1973राणोली (सीकर), राजस्थान; समाधि नसीराबाद (अजमेर)दिगंबर
- आचार्य शिवसागरआचार्य शांतिसागर परंपरा के द्वितीय पट्टधर1901–1969जन्म औरंगाबाद जिला, महाराष्ट्र; समाधि श्री महावीरजी, राजस्थानदिगंबर
- आचार्य देशभूषणविद्वान आचार्य, अनुवादक और आचार्य विद्यानंद के गुरु1905–1987कोथली, बेलगावी जिला, कर्नाटकदिगंबर
- आचार्य तुलसीतेरापंथ संघ के नवम आचार्य1914–1997लाडनूं, राजस्थानतेरापंथ (श्वेतांबर)
- आचार्य धर्मसागरआचार्य शांतिसागर परंपरा के तृतीय पट्टधर1914–1987गंभीरा (बूंदी), राजस्थान; समाधि सीकर, राजस्थानदिगंबर
- आचार्य महाप्रज्ञतेरापंथ के 10वें आचार्य; प्रेक्षा ध्यान के प्रणेता1920–2010टमकोर, राजस्थान; सरदारशहर में देहावसानतेरापंथ (श्वेतांबर)
- आचार्य विद्यानंदविद्वान आचार्य; 1974 के महावीर निर्वाण महोत्सव के मार्गदर्शक1925–2019शेडबाल (बेलगावी), कर्नाटक; बाद में दिल्लीदिगंबर
- आचार्य विद्यासागरकवि, गुरु और हमारे युग के सर्वाधिक पूज्य दिगंबर आचार्यों में से एक1946–2024सदलगा, बेलगावी ज़िला, कर्नाटकदिगंबर
- आचार्य समयसागरआचार्य विद्यासागर के उत्तराधिकारी और उनके संघ के प्रमुखजन्म 1958सदलगा (बेलगावी), कर्नाटक; संघ मुख्यतः मध्य प्रदेश मेंदिगंबर
- आचार्य महाश्रमणतेरापंथ धर्मसंघ के 11वें और वर्तमान आचार्यजन्म 1962सरदारशहर (चूरू ज़िला), राजस्थानतेरापंथ (श्वेतांबर)
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