आचार्य

युगों-युगों के आचार्य

तीर्थंकरों के बाद, 2,500 वर्षों से यह उपदेश उन्होंने आगे बढ़ाया है जिन्होंने इसे जिया — शिष्य, विद्वान, कवि और विहार करने वाले तपस्वी। ये उनकी कथाएँ हैं।

युग 2 · लगभग 400 ई.पू. – 500 ई.

उपदेश के संरक्षक

वे आचार्य जिन्होंने महावीर के बाद की प्रारंभिक शताब्दियों में शास्त्रों को सुरक्षित रखा और लिपिबद्ध किया।

युग 3 · लगभग 450 – 1700 ई.

शास्त्रीय युग के महान आचार्य

दार्शनिक, तर्कशास्त्री, कवि और राजाओं के गुरु — कर्नाटक के राजदरबारों से गुजरात और अकबर की दिल्ली तक।

युग 4 · 1800 के दशक से आज तक

आधुनिक युग

पिछली दो शताब्दियों के आचार्य जिन्होंने मुनि-मार्ग को नवजीवन दिया और जैन मूल्यों को जन-जीवन तक पहुँचाया।

गुरु और शिष्य

गुरु, शिष्य और पट्टधर की वे परंपराएँ जो आज हर संघ को आगे ले जा रही हैं। कथा पढ़ने के लिए नाम पर टैप करें।

और कथाएँ जल्द आ रही हैं

हम नियमित रूप से नई जीवन-कथाएँ जोड़ रहे हैं — आचार्य, मुनि, आर्यिकाएँ और श्रद्धालु श्रावक। क्या आप किसी विशेष व्यक्ति की कथा पढ़ना चाहते हैं? हमें बताएँ।

कथा सुझाएँ