आचार्य · शास्त्रीय युग के महान आचार्य

आचार्य हेमचंद्र

कलिकाल सर्वज्ञ — “कलियुग के सर्वज्ञ”

1088–1173 ईस्वी · धंधुका और पाटन, गुजरात

श्वेतांबर

विद्वान, कवि और राजा कुमारपाल के मार्गदर्शक

“कलिकाल सर्वज्ञ” — व्याकरणाचार्य, कवि और राजा कुमारपाल के मार्गदर्शक।

कथा

गुजरात के धंधुका में चांगदेव के रूप में जन्मे, उन्हें बाल्यावस्था में आचार्य देवचंद्र सूरि ने दीक्षा दी, और वे भारत के सर्वाधिक बहुमुखी विद्वानों में से एक बने। राजा सिद्धराज जयसिंह के अनुरोध पर उन्होंने संस्कृत और प्राकृत का संपूर्ण व्याकरण सिद्ध-हेम-शब्दानुशासन लिखा, जिसे राजा ने उत्सवपूर्वक हाथी पर रखकर पूरे नगर में घुमाया।

वे सिद्धराज के उत्तराधिकारी राजा कुमारपाल के मार्गदर्शक बने, जिन्होंने जैन उपदेश को अपनाया और परंपरा के अनुसार अपने राज्य में पशु-हिंसा निषिद्ध कर दी। उनके लिए हेमचंद्र ने योगशास्त्र लिखा, जो जैन जीवन और ध्यान का व्यावहारिक मार्गदर्शक है।

उनका त्रिषष्टि-शलाका-पुरुष-चरित्र, 63 शलाका पुरुषों का जीवन-चरित, तीर्थंकरों की कथाओं की लगभग हर आधुनिक पुनर्प्रस्तुति का स्रोत है — इस साइट पर आप जो पढ़ते हैं उसका भी बड़ा भाग। उन्होंने काव्यशास्त्र, न्याय, कोश और इतिहास पर भी लिखा। उनकी उपाधि कलिकाल सर्वज्ञ का अर्थ है — वह जो कलियुग में सब कुछ जानता था।

किसके लिए स्मरणीय

  • सिद्धहेम व्याकरण
  • त्रिषष्टि शलाका पुरुष चरित्र
  • योगशास्त्र
काल
1088–1173 ईस्वी
स्थान
धंधुका और पाटन, गुजरात
स्रोतप्रभावकचरित; मेरुतुंग का प्रबंधचिंतामणि; उनकी अपनी रचनाएँ।