आचार्य · आधुनिक युग

आचार्य शिवसागर

हीरालाल रांवका (गृहस्थ नाम)

1901–1969 · जन्म औरंगाबाद जिला, महाराष्ट्र; समाधि श्री महावीरजी, राजस्थान

दिगंबर
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Acharya Shivsagar

आचार्य शांतिसागर परंपरा के द्वितीय पट्टधर

वीरसागर जी के प्रथम मुनि शिष्य, जिन्होंने 1957 से 1969 तक संघ का नेतृत्व किया और विद्यासागर के भावी गुरु ज्ञानसागर को मुनि दीक्षा दी।

शिष्य — आचार्य वीरसागर

कथा

1901 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के अड़गाँव में एक खंडेलवाल व्यापारी परिवार में जन्मे हीरालाल ने बचपन में ही प्लेग में माता-पिता दोनों को खो दिया। आचार्य शांतिसागर के संघ से प्रभावित होकर उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत लिया, फिर 1943 में आचार्य वीरसागर से क्षुल्लक दीक्षा ली। 1949 में नागौर (राजस्थान) में वीरसागर जी ने उन्हें मुनि शिवसागर के रूप में मुनि दीक्षा दी — वे उनके प्रथम मुनि शिष्य थे। 1957 में वीरसागर जी की समाधि के बाद संघ ने खानियाजी, जयपुर में उन्हें आचार्य बनाया।

लगभग ग्यारह वर्षों तक शिवसागर जी ने अजमेर, ब्यावर, सीकर, कोटा और उदयपुर जैसे राजस्थान के नगरों में संघ का नेतृत्व किया और अनेक मुनियों व आर्यिकाओं को दीक्षा दी। 1959 में जयपुर में उन्होंने विद्वान भूरामल जी को मुनि दीक्षा दी, जो ज्ञानसागर बने। उनके सान्निध्य में विद्वानों ने प्रसिद्ध खानिया तत्त्वचर्चा की, जो जैन सिद्धांत पर एक लिखित शास्त्रार्थ था। थोड़े दिनों के ज्वर के बाद 16 फ़रवरी 1969 को श्री महावीरजी में उनकी समाधि हुई और संघ ने धर्मसागर जी को अगला आचार्य चुना।

किसके लिए स्मरणीय

  • द्वितीय पट्टधर (1957)
  • खानिया तत्त्वचर्चा
काल
1901 – 16 फ़रवरी 1969
स्थान
जन्म औरंगाबाद जिला, महाराष्ट्र; समाधि श्री महावीरजी, राजस्थान

स्रोत: दिगजैनविकी; शांतिसागर संघ की पट्टावली एवं इतिहास।