जैन आगमों पर अपने अधिकार के कारण नेमिचंद्र ने सिद्धांत चक्रवर्ती — सिद्धांत के सम्राट — की उपाधि पाई। वे चामुंडराय के गुरु थे, जो गंग वंश के सेनापति और मंत्री थे और जिन्होंने श्रवणबेलगोला में बाहुबली की विशाल प्रतिमा का निर्माण कराया, जो लगभग 981 ईस्वी में पूर्ण हुई।
अपने शिष्य के लिए उन्होंने विशाल धवला शास्त्रों को संक्षिप्त कर गोम्मटसार की रचना की — जिसका नाम चामुंडराय के प्रिय नाम गोम्मट पर रखा गया, और इसी से बाहुबली की प्रतिमा गोम्मटेश्वर कहलाने लगी। उन्होंने जैन लोक-रचना पर त्रिलोकसार और छह द्रव्यों का संक्षिप्त परिचय देने वाला द्रव्यसंग्रह भी लिखा, जिसे विद्यार्थी आज भी कंठस्थ करते हैं। स्वयं चामुंडराय ने चावुंडराय पुराण लिखा, जो कन्नड़ की आरंभिक गद्य रचनाओं में से एक है।

